पुरोहितों एवं शिक्षकों के प्रति
मण्डली के लोगों का कर्तव्य
प्रभु ने भी ठहराया , की जो लोग सुसमाचार सुनाते हैं, उनकी जीविका सुसमाचार से हो । 1 कोरिन्थ 9: 14 ।
जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वास्तुओं में सिखाने वाले को भागी करें । गलाती 6:6 ।
जो प्राचीन ,अच्छा प्रबन्ध करते हैं , विशेष करके जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं , दोगुने आदर के योग्य समझे जाऐं, क्योंकि पवित्र शास्त्र कहता है ,की "दाँवने वाले बैल का मुंह ना बंधाना " और " मजदूर अपनी मजदूरी का हक़दार है ।" 1 तिमो० 5:17-18 ।
हे भाईयो , हम तुम से बिनती करते हैं, की जो तुम में परिश्रम करते हैं , और प्रभु में तुम्हारे अगुवे हैं, और तुम्हें शिक्षा देते हैं , उनका सम्मान करो । और उनके काम के कारण प्रेम के साथ उनको बहुत ही आदर के योग्य समझो । आपस में मेलमिलाप से रहो । 1 थिस्स . 5: 12-13
अपने अगुवों को मानो और उनके अधीन रहो, क्योंकि वे उनकी नाई तुम्हारे प्राणों के लिए जागते रहते, जिन्हें लेखा देना पड़ेगा, कि वे यह काम आनंद से करें, न कि ठंडी साँस लेकर , क्योंकि इससे तुम्हें कुछ लाभ नहीं ।इब्रानी० 13:17 ।
राज्य शासक लोग
हरएक जन प्रधान अधिकारिओं के अधीन रहें , क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की और से न हो और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं । इससे जी कोई अधिकार का बिरोध का बिरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का सामना करता है और सामना करने वाले दण्ड पाएंगे । क्योंकि अधिकारी अच्छे काम के नहीं पर बुरे काम के लिए डर का कारण है ; अत: यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है , तो अच्छा काम कर, और उसकी और से तेरी सराहना होगी; क्योंकि वह तेरी भलाई के लिए परमेश्वर का सेवक है । परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर आदि । रोमी 13:1-4
राज्य शासकों के विषय में प्रजा का कर्तव्य
जो कैसर का है, वह कैसर को दो । मति 22:29 । इसलिए अधीन रहना ना केवल उस क्रोध के कारण, पर डर से वरन् विवेक के कारण अवश्य है : इसलिए कर भी दो, क्योंकि वे परमेश्वर के सेवक हैं और सदा उसी का काम मैं लगे रहते हैं। सो हर एक का हक़ चुकाया करो, जिसे कर चाहिए, उसे कर दो, जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो । जिससे/ जिनसे डरना चाहिए,उससे/उनसे डरो, जिसका/जिनका आदर करना चाहिए, उसका/उनका आदर करो । रोमी 13:5-6 ।
सो मैं पहले यह उपदेश देता हूँ, की बिनती,प्रार्थना, और निवेदन, धन्यवाद सब मनुष्यों के लिए किया कए जाएं । राजाओं और सब ऊँचे पद वालों के निमित इसलिए, की हम बिश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गंभीरता से जीवन बिताएं यह हमारे उधारकर्ता परमेश्वर को अच्छा लगता और भाता है । 1 टीमो0 2:1-3 ।
लोगों को सुध दिला, कि हाकिमों और अधिकारियों के अधीन रहें और उसकी मानें और हरएक अच्छे काम के लिए तैयार रहें । तीतूस 3: 1 ।
प्रभु के लिए मनुष्यों के ठहराए हुए हरएक प्रबंध के अधीन रहो चाहे रजा के , कि वह सब पर प्रधान है, चाहे हकीमों के, की वे कुकर्मियों का दण्ड देने और सुकर्मियों की प्रशंसा के लिए उसके भेजे हुए हैं । 1 पतरस 2:13-14 ।
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