खण्ड 7
पहला शेष संग्रह
प्रभु की बेदी के निकट जाने वालों के लिए
प्रश्नोत्तर
पाप स्वीकार , दस आज्ञा, प्रेरितों का विश्वास दर्पण, प्रभु की प्रार्थना , बपतिस्मा और प्रभु भोज वचन सम्बन्धी उपदेश के बाद पुरोहित पूछे-
क्या तुम अपने पापों को मानते हो ?
हाँ, मैं मानता / मानती हूँ की मैं पापी हूँ ।
तुम कैसे जानते हो ?
दस आज्ञाओं से, जिनका मैंने पालन नहीं किया ।
क्या तुम अपने पापों के लिए शोकित हो ?
हाँ मैं शोकित हूँ की मैंने ईश्वर के विरुद्ध पाप किया है ।
तुम अपने पापों के कारण ईश्वर के सम्मुख किस योग्य हुए हो ?
मैं उसके क्रोध और अप्रसन्नता , दैनिक मृत्यु और अनंत बिनाश के योग्य हुआ हूँ / हुई हूँ ( देखें रोमियों 6:21-23 )
क्या तुम त्राण पाना चाहते हो ?
हाँ , यह मेरी आशा है ।
तब तुम किससे अपने को शांति देते हो ?
मैं अपने को प्रभु यीशु ख्रिस्त से शांति देता हूँ/देती हूँ ।
प्रभु यीशु ख्रिस्त कौन है ?
वह ईश्वर का पुत्र, सच्चा ईश्वर और सच्चा मनुष्य है ।
कितने ईश्वर हैं ?
एक ईश्वर है, परन्तु उसमें तीन व्यक्ति, अर्थात् पिता,पुत्र और पवित्र आत्मा है ।
ख्रिस्त ने तुम्हारे लिये क्या किया है, की तुम उससे अपने को शांति देते हो ?
वह मेरे लिये मर गया और पाप क्षमा के लिए क्रुस पर अपना लोहू बहाया ।
क्या पिता भी तुम्हारे लिये मर गया ?
नहीं, क्योंकि पिता निर्केवल ईश्वर अमर है और पवित्र आत्मा भी, परन्तु पुत्र सच्चा ईश्वर और सच्चा मनुष्य होकर मेरे लिये मर गया और अपना लोहू बहाया है ।
तुम यह कैसे जानते हो ?
मैं पवित्र मंगल समाचार और प्रभुभोज के सक्रामेंट के वचन और उसकी देह और लोहू से, जो सक्रामेन्त में चिन्ह के लिये मुझे दिया गया है , यह मैं जनता हूँ ।
वह कौन वचन है ?
वह यही वचन है की "हमारे प्रभु यीशु ख्रिस्त ने जिस रात वह पकड़वाया गया, उसी रात को रोटी ली और धन्यवाद करके तोड़ा और अपने शिष्यों को दिया और कहा, लो खाओ, यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिए दी जाती है, मेरे स्मरण के लिए यह किया करो ।"
इसी रीति से बियारी के पीछे कटोरा भी लेके धन्य माना और उसे उन्हें दिया और कहा, " लो तुम सब इसमें से पियो, यह मेरा लोहू अर्थात नये नियम का लोहू है ,जो तुम्हारे और बहुतों के पापमोक्षण के लिए बाहाया जाता है । जब-जब तुम इससे पियो तब-तब मेरे स्मरण के लिए यह किया करो ।"
तो क्या तुम विश्वास करते हो की बेदी के सक्रामेन्त में ख्रिस्त सच देह और लोहू है ?
हाँ मैं विश्वास करता/करती हूँ ।
कौन सा वचन तुम मैं यह विश्वास उत्पन्न करता है ?
ख्रिस्त का यह वचन की " लो खाओ , यह मेरी देह है , तुम सब इसमें से पियो , यह मेरा लोहू है "
जब हम उसकी देह खाते और उसका लोहू पीते हैं तब हमारे लिए क्या करना उचित है ?
यह की हम उसकी मृत्यु और लोहू-बहाव को प्रचारों, जैसे उसने हमको सिखाया है अर्थात " जब - जब तुम इससे पियो तब मेरे स्मरण के लिए यह किया करो " वैसे ही हम भी उसकी मृत्यु और लोहू बहाव का प्रचार और स्मरण करें ।
किस कारण से हम उसकी मृत्यु का स्मरण और प्रचार करें ?
इसलिये की हम विश्वास करना सीखें, की कोई प्राणी ख्रिस्त को छोड़ कर, जो सच्चा ईश्वर और सच्चा मनुष्य है हमारे पापों के लिये नहीं मारा । दूसरा की हम अपने पापों से भय रखना और उसको बहुत भारी समझना सीखें । हम सभी उसी पर आनंद सहित आसरा रखें और यों ही इसी विश्वास के द्वारा त्राण प्राप्त करें ।
क्या है जिसने ख्रिस्त को तुम्हारे पापों के लिए मरने को प्रेरित किया ?
उसका बड़ा प्रेम जो पिता पर, मुझ पर और दूसरे पापियों पर था जैसे युहन्ना 15, रोमी 6, गलाती 2 में लिखा है ।
तब तुम क्यों प्रभु-भोज में जाना चाहते हो ?
इसलिये ,की मैं यह विश्वास करना सीखूं की ख्रिस्त बड़े प्रेम से मेरे पापों के कारण मर गया, जैसा कहा गया है और तब उसी से ईश्वर और अपने पड़ोसी पर प्रेम करना भी सीखूं ।
बेदी के सक्रामेन्त का बराबर व्यवहार करने के लिए ख्रिस्तीयों को क्या चेतवानी और क्या प्रोत्साहन देना चाहिए ?
ऐसा करने की आज्ञा एवं प्रतिज्ञा दोनों प्रभु यीशु ख्रिस्त की ओर से है । दूसरी बात, ख्रिस्त का वह आग्रहपूर्ण प्रयोजन जिसको उसने क्रूस मृत्यु के द्वारा प्रदर्शित किया , उसका आदरपूर्वक स्मरण करना ही वह चेतवानी एवं प्रोत्साहन है । बेदी के सक्रामेन्त का व्यवहार करने का तात्पर्ज़ उसकी आज्ञा, बुलाहट और प्रतिज्ञा का सम्मान करना है ।
परन्तु जब ख्रीस्तीय ऐसा दुःख अनुभब नहीं करते अथवा सक्रामेन्त के लिये भूखे प्यासे नहीं होते हैं, तब वे क्या करें ?
1. उनको यह सुपरामर्श मिलता है, की वह पहले अपने पर दृष्टि कर जांचें, की मेरा शरीर और लोहू है या नहीं और धर्म पुस्तक पर विश्वास करें, जिसमें इसके विषय गलाति 5, रोमी 6, में लिखा गया है ।
2. यह चिंतन करें की क्या मैं अब तक संसार के प्रति आसकत हूँ? और सोचें की क्या पाप और दुःख मुझ पर अब तक प्रबल है ? जैसे युहन्ना 15:16, 1 युहन्ना 2:15-17 में कहता है ।
3. ऐसे ही वह देख लो, की शैतान मेरे चरों ओर है, जो झूठ और घात सहित रात और दिन मुझे परेशान करके बाहर और भीतर चैन नहीं देता है, जैसे धर्म पुस्तक के युहन्ना 6:16,1 पितर 5, इफिसी 6, 2 तिमो. 2 में वर्णन है ।
पहला शेष संग्रह
प्रभु की बेदी के निकट जाने वालों के लिए
प्रश्नोत्तर
पाप स्वीकार , दस आज्ञा, प्रेरितों का विश्वास दर्पण, प्रभु की प्रार्थना , बपतिस्मा और प्रभु भोज वचन सम्बन्धी उपदेश के बाद पुरोहित पूछे-
क्या तुम अपने पापों को मानते हो ?
हाँ, मैं मानता / मानती हूँ की मैं पापी हूँ ।
तुम कैसे जानते हो ?
दस आज्ञाओं से, जिनका मैंने पालन नहीं किया ।
क्या तुम अपने पापों के लिए शोकित हो ?
हाँ मैं शोकित हूँ की मैंने ईश्वर के विरुद्ध पाप किया है ।
तुम अपने पापों के कारण ईश्वर के सम्मुख किस योग्य हुए हो ?
मैं उसके क्रोध और अप्रसन्नता , दैनिक मृत्यु और अनंत बिनाश के योग्य हुआ हूँ / हुई हूँ ( देखें रोमियों 6:21-23 )
क्या तुम त्राण पाना चाहते हो ?
हाँ , यह मेरी आशा है ।
तब तुम किससे अपने को शांति देते हो ?
मैं अपने को प्रभु यीशु ख्रिस्त से शांति देता हूँ/देती हूँ ।
प्रभु यीशु ख्रिस्त कौन है ?
वह ईश्वर का पुत्र, सच्चा ईश्वर और सच्चा मनुष्य है ।
कितने ईश्वर हैं ?
एक ईश्वर है, परन्तु उसमें तीन व्यक्ति, अर्थात् पिता,पुत्र और पवित्र आत्मा है ।
ख्रिस्त ने तुम्हारे लिये क्या किया है, की तुम उससे अपने को शांति देते हो ?
वह मेरे लिये मर गया और पाप क्षमा के लिए क्रुस पर अपना लोहू बहाया ।
क्या पिता भी तुम्हारे लिये मर गया ?
नहीं, क्योंकि पिता निर्केवल ईश्वर अमर है और पवित्र आत्मा भी, परन्तु पुत्र सच्चा ईश्वर और सच्चा मनुष्य होकर मेरे लिये मर गया और अपना लोहू बहाया है ।
तुम यह कैसे जानते हो ?
मैं पवित्र मंगल समाचार और प्रभुभोज के सक्रामेंट के वचन और उसकी देह और लोहू से, जो सक्रामेन्त में चिन्ह के लिये मुझे दिया गया है , यह मैं जनता हूँ ।
वह कौन वचन है ?
वह यही वचन है की "हमारे प्रभु यीशु ख्रिस्त ने जिस रात वह पकड़वाया गया, उसी रात को रोटी ली और धन्यवाद करके तोड़ा और अपने शिष्यों को दिया और कहा, लो खाओ, यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिए दी जाती है, मेरे स्मरण के लिए यह किया करो ।"
इसी रीति से बियारी के पीछे कटोरा भी लेके धन्य माना और उसे उन्हें दिया और कहा, " लो तुम सब इसमें से पियो, यह मेरा लोहू अर्थात नये नियम का लोहू है ,जो तुम्हारे और बहुतों के पापमोक्षण के लिए बाहाया जाता है । जब-जब तुम इससे पियो तब-तब मेरे स्मरण के लिए यह किया करो ।"
तो क्या तुम विश्वास करते हो की बेदी के सक्रामेन्त में ख्रिस्त सच देह और लोहू है ?
हाँ मैं विश्वास करता/करती हूँ ।
कौन सा वचन तुम मैं यह विश्वास उत्पन्न करता है ?
ख्रिस्त का यह वचन की " लो खाओ , यह मेरी देह है , तुम सब इसमें से पियो , यह मेरा लोहू है "
जब हम उसकी देह खाते और उसका लोहू पीते हैं तब हमारे लिए क्या करना उचित है ?
यह की हम उसकी मृत्यु और लोहू-बहाव को प्रचारों, जैसे उसने हमको सिखाया है अर्थात " जब - जब तुम इससे पियो तब मेरे स्मरण के लिए यह किया करो " वैसे ही हम भी उसकी मृत्यु और लोहू बहाव का प्रचार और स्मरण करें ।
किस कारण से हम उसकी मृत्यु का स्मरण और प्रचार करें ?
इसलिये की हम विश्वास करना सीखें, की कोई प्राणी ख्रिस्त को छोड़ कर, जो सच्चा ईश्वर और सच्चा मनुष्य है हमारे पापों के लिये नहीं मारा । दूसरा की हम अपने पापों से भय रखना और उसको बहुत भारी समझना सीखें । हम सभी उसी पर आनंद सहित आसरा रखें और यों ही इसी विश्वास के द्वारा त्राण प्राप्त करें ।
क्या है जिसने ख्रिस्त को तुम्हारे पापों के लिए मरने को प्रेरित किया ?
उसका बड़ा प्रेम जो पिता पर, मुझ पर और दूसरे पापियों पर था जैसे युहन्ना 15, रोमी 6, गलाती 2 में लिखा है ।
तब तुम क्यों प्रभु-भोज में जाना चाहते हो ?
इसलिये ,की मैं यह विश्वास करना सीखूं की ख्रिस्त बड़े प्रेम से मेरे पापों के कारण मर गया, जैसा कहा गया है और तब उसी से ईश्वर और अपने पड़ोसी पर प्रेम करना भी सीखूं ।
बेदी के सक्रामेन्त का बराबर व्यवहार करने के लिए ख्रिस्तीयों को क्या चेतवानी और क्या प्रोत्साहन देना चाहिए ?
ऐसा करने की आज्ञा एवं प्रतिज्ञा दोनों प्रभु यीशु ख्रिस्त की ओर से है । दूसरी बात, ख्रिस्त का वह आग्रहपूर्ण प्रयोजन जिसको उसने क्रूस मृत्यु के द्वारा प्रदर्शित किया , उसका आदरपूर्वक स्मरण करना ही वह चेतवानी एवं प्रोत्साहन है । बेदी के सक्रामेन्त का व्यवहार करने का तात्पर्ज़ उसकी आज्ञा, बुलाहट और प्रतिज्ञा का सम्मान करना है ।
परन्तु जब ख्रीस्तीय ऐसा दुःख अनुभब नहीं करते अथवा सक्रामेन्त के लिये भूखे प्यासे नहीं होते हैं, तब वे क्या करें ?
1. उनको यह सुपरामर्श मिलता है, की वह पहले अपने पर दृष्टि कर जांचें, की मेरा शरीर और लोहू है या नहीं और धर्म पुस्तक पर विश्वास करें, जिसमें इसके विषय गलाति 5, रोमी 6, में लिखा गया है ।
2. यह चिंतन करें की क्या मैं अब तक संसार के प्रति आसकत हूँ? और सोचें की क्या पाप और दुःख मुझ पर अब तक प्रबल है ? जैसे युहन्ना 15:16, 1 युहन्ना 2:15-17 में कहता है ।
3. ऐसे ही वह देख लो, की शैतान मेरे चरों ओर है, जो झूठ और घात सहित रात और दिन मुझे परेशान करके बाहर और भीतर चैन नहीं देता है, जैसे धर्म पुस्तक के युहन्ना 6:16,1 पितर 5, इफिसी 6, 2 तिमो. 2 में वर्णन है ।
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