दास-दासी और बनिहारों के लिये
हे दासो, शारीर के अनुशार तुम्हारे स्वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते और कांपते हुए जैसे मसीह की वैसे ही उनकी आज्ञा मानो ! और मनुष्यों को प्रसन्न करने की नई दिखने के लिए सेवा ना करो, पर मसीह के दासों की नाई मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो । और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुमति से करो । क्योंकि तुम जानते हो, की जो कोई, जैसा अच काम करेगा चाहे दास हो या स्वतंत्र, प्रभु से वैसा ही पाएगा । इफिसी 6:5-8, कुलुसी 3:22 ।
घर के स्वामी और स्वामिनी के लिये
हे स्वमियों तुम भी धमकियां छोड़ कर उनके साथ वैसा ही व्यवहार करो,क्योंकि जानते हो, की उनका और तुम्हारा दोनों का स्वामी स्वर्ग में है, वह किसी का पक्ष नहीं करता । इफिसी 6 : 9 ।
सब युवक - युवतियों के लिये
हे नवयुवको , तुम भी प्रचीनों के अधीन रहो, वरन् तुम सब के सब एक दुसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बाँधे रहो, क्योंकि परमेश्वर, अभिमानियों का सामना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है । इसलिये परमेश्वर के बलवंत हाथ के निचे दीनता से रहो, जिसे वह तुम्हें उचित समय पर बढाए । 1 पतरस 5:5-6 ।
विधवाओं के लिये
जो सचमुच विधवा है और उसका कोई नहीं , वह परमेश्वर पर आशा रखती है और रात-दिन बिनती और प्रार्थना में लौलीन रहती है । परन्तु जो भोग बिलास में पड़ गई हैं, वह जीते जी मर गई है । 1 तिमो० 5:5-6 ।
मण्डली के सब लोगों के लिये
" तू अपने पडोसी से अपने सामान प्रेम रख " रोमी 13:9 । सबसे पहले बिन्ती प्रार्थना , निवेदन और धन्यवाद , सब मनुष्यों के लिये किये जाएँ । 1 तिमो० 2:1 ।
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